Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 200
Punishment for non-treatment of victim
Whoever, being in charge of a hospital, public or private, whether run by the Central Government, the State Government, local bodies or any other person, contravenes the provisions of section 397 of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023, shall be punished with imprisonment for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान उस सुधार को आगे बढ़ाता है जो 2012 की दिल्ली सामूहिक बलात्कार घटना के बाद भारतीय आपराधिक प्रक्रिया में पहली बार लाया गया था, जब यह उजागर हुआ कि अम्ल-आक्रमण, बलात्कार और समान अपराधों के पीड़ितों को कुछ अस्पताल पुलिस कागज़ात या भुगतान माँगे बिना उपचार देने से मना कर देते थे। क़ानून (मूलतः CrPC की धारा 357C, अब BNSS की धारा 397) ने हर अस्पताल—सरकारी या निजी—पर तुरंत निःशुल्क प्राथमिक उपचार या चिकित्सीय सहायता देना और पुलिस को सूचित करना अनिवार्य कर दिया। BNS की धारा 200 इस कर्तव्य के उल्लंघन पर आपराधिक दंड प्रदान करती है ताकि अस्पताल इसे नज़रअंदाज़ न कर सकें।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: केवल सरकारी अस्पतालों को ही इस नियम का पालन करना होता है।
तथ्य: क़ानून निजी अस्पतालों, सरकारी अस्पतालों और स्थानीय निकाय द्वारा संचालित अस्पतालों—सभी—पर समान रूप से लागू होता है; उपचार की ‘ज़िम्मेदारी में’ रहने वाला कोई भी अस्पताल इसका पालन करेगा।
मिथक: अस्पताल पीड़ित का उपचार करने से पहले पुलिस शिकायत का इंतज़ार कर सकते हैं।
तथ्य: उल्लेखित BNSS की धारा 397 के तहत, उपचार तुरंत दिया जाना अनिवार्य है; पुलिस को सूचित करना एक अलग कर्तव्य है जो उपचार के बाद होता है, उससे पहले नहीं।