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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 202

Public servant unlawfully engaging in trade

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सरकारी सेवा-नियम (जैसे All India Services Conduct Rules) अक्सर लोक सेवकों को निजी व्यवसाय चलाने से रोकते हैं, ताकि उनका समय, ध्यान और निर्णय निजी लाभ या हितों के टकराव से प्रभावित न हों। पहले, ऐसे नियम का उल्लंघन मुख्यतः विभागीय मामला माना जाता था। पुरानी Indian Penal Code की धारा 168 से आगे लाई गई इस प्रावधान ने उस नियम के समर्थन में आपराधिक दंड जोड़ा, जिससे उल्लंघन केवल सेवा-नियम तोड़ना नहीं, बल्कि दंडनीय अपराध माना जाने लगा।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा हर सरकारी कर्मचारी पर किसी भी प्रकार की अतिरिक्त आमदनी, जैसे अपनी संपत्ति के किराए से आय, पर स्थायी पाबंदी नहीं लगाती।

    तथ्य: यह केवल ‘व्यापार’ पर तब लागू होती है जब किसी व्यक्ति पर उसके सेवा-नियमों द्वारा विशेष रूप से और विधिवत् उस गतिविधि से दूर रहने का बंधन हो—किराए जैसी निष्क्रिय आमदनी अपने आप में इस धारा के तहत ‘व्यापार’ नहीं मानी जाती।

  • मिथक: यह Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 द्वारा पेश किया गया एक बिल्कुल नया अपराध नहीं है।

    तथ्य: यह उसी अपराध की निरंतरता है जो Indian Penal Code, 1860 की धारा 168 के रूप में मौजूद था; नए संहिता में केवल पुनः-संख्या और पुनः-शब्दांकन किया गया है।