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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 193

Liability of owner, occupier, etc., of land on which an unlawful assembly or riot takes

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान औपनिवेशिक काल के नियम (मूलतः Indian Penal Code, 1860 की Section 154) की निरंतरता है, जिसका उद्देश्य भूमि‑स्वामियों को अपनी संपत्ति पर शांति‑व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तरदायी बनाना था। विचार यह था कि जो भूमि को नियंत्रित करते हैं, वे उस पर होने वाली घटनाओं पर प्रभाव रखते हैं; यदि वे अपने लाभ के लिए हिंसा पर आंखें मूंद लें, तो वे आंशिक जिम्मेदार हैं। यह भूमि‑स्वामियों और उनके प्रतिनिधियों को निष्क्रिय रहने के बजाय सक्रिय रूप से सूचना देने और अशांति रोकने के लिए प्रोत्साहित करता है, खासकर तब जब परिणाम से उन्हें लाभ होने की संभावना हो।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

पुराने IPC Section 154 के अंतर्गत न्यायालयों ने माना कि मात्र भूमि का स्वामित्व उत्तरदायित्व ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है; वास्तविक जानकारी होना या उचित आधार पर विश्वास होना चाहिए कि दंगा या अवैध जमाव होने वाला है या हो रहा है। न्यायालयों ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्तव्य ‘वैध उपाय’ अपनाने का है—मालिक से यह अपेक्षा नहीं कि वह दंगाइयों से शारीरिक रूप से भिड़े, पर कम से कम पुलिस को सूचित करे और युक्तिसंगत निवारक कदम उठाए। इस धारा के अंतर्गत दायित्व प्रतिनिधिक (विकेरियस) और दोष‑आधारित माना जाता है, न कि निरपेक्ष।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: सिर्फ उस भूमि का मालिक होना जहां दंगा हुआ, अपने‑आप में आपको दोषी बना देता है।

    तथ्य: आप तभी उत्तरदायी होते हैं जब आप (या आपके प्रतिनिधि/प्रबंधक) को वास्तव में पता था या उचित कारण से विश्वास था कि दंगा होने वाला है या हो रहा है, और आपने कार्रवाई नहीं की—केवल इसलिए नहीं कि वह आपकी संपत्ति पर घटित हुआ।

  • मिथक: यह धारा भूमि‑स्वामियों से यह अपेक्षा करती है कि वे स्वयं दंगाइयों को शारीरिक रूप से रोकें।

    तथ्य: कानून केवल ‘सभी वैध उपाय’ अपनाने की मांग करता है—जैसे पुलिस को सूचित करना—न कि व्यक्तिगत तौर पर भिड़ना या टकराव करना।