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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 175

False statement in connection with an election

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

निष्पक्ष चुनाव इस पर निर्भर करते हैं कि मतदाताओं को प्रत्याशियों के बारे में सही जानकारी मिले, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें। इतिहास में चुनाव अभियानों में अफ़वाहें, कीचड़ उछालना और चरित्र पर हमले होते रहे हैं, जिनका उद्देश्य मुद्दों पर वास्तविक बहस के बजाय छल से मतदाताओं को प्रभावित करना रहा है। यह प्रावधान, जो पुराने भारतीय दंड संहिता की धारा 171G से आया है, प्रत्याशी के निजी जीवन या आचरण के बारे में जानबूझकर फैलाई गई झूठी बातों को रोकने के लिए बनाया गया, ताकि ईमानदार आलोचना, राय या प्रत्याशी के सार्वजनिक कार्यों पर निष्पक्ष टिप्पणी को अपराध ठहराए बिना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता की रक्षा की जा सके।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

पूर्ववर्ती प्रावधान (IPC धारा 171G) के अंतर्गत, न्यायालयों ने सामान्यतः माना है कि झूठा बयान प्रत्याशी के निजी चरित्र या आचरण के बारे में होना चाहिए — न कि उसके सार्वजनिक या राजनीतिक रुख के बारे में — और अभियुक्त को यह पता होना चाहिए, यह विश्वास होना चाहिए, या सत्यता पर उसका कोई विश्वास न होना चाहिए कि कथन झूठा है। न्यायालयों ने यह भी रेखांकित किया है कि मात्र आलोचना, व्यंग्य या राय इस प्रावधान के दायरे में नहीं आती; चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के इरादे से किया गया झूठा तथ्यात्मक दावा होना चाहिए। क्योंकि इस धारा के अंतर्गत अभियोजन अपेक्षाकृत विरल हैं, इसलिए नज़ीर सीमित और तथ्य-विशिष्ट ही रही है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: चुनाव के दौरान प्रत्याशी की कोई भी आलोचना करने पर इस क़ानून के तहत सज़ा हो सकती है।

    तथ्य: केवल वे झूठे तथ्यात्मक कथन, जो किसी प्रत्याशी के निजी चरित्र या आचरण के बारे में हों — और जिन्हें बोलने/फैलाने वाला व्यक्ति जानता हो कि वे झूठे हैं, या उन्हें झूठा मानता हो, या उनकी सच्चाई पर उसका कोई विश्वास न हो — इसी दायरे में आते हैं। ईमानदार राय, निष्पक्ष आलोचना या सच्चे कथन दंडनीय नहीं हैं।

  • मिथक: यह क़ानून प्रत्याशी के राजनीतिक विचारों या पार्टी नीतियों के बारे में झूठे बयानों को भी कवर करता है।

    तथ्य: न्यायालयों ने इस प्रावधान की व्याख्या इसे केवल निजी चरित्र या आचरण से सम्बद्ध बयानों तक सीमित मानी है, न कि राजनीतिक या वैचारिक रुख़ तक।

  • मिथक: सज़ा में कारावास भी शामिल है।

    तथ्य: पाठ के अनुसार, एकमात्र निर्धारित दंड जुर्माना है।