Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 164
Harbouring deserter
Whoever, except as hereinafter excepted, knowing or having reason to believe that an officer, soldier, sailor or airman, in the Army, Navy or Air Force of the Government of India, has deserted, harbours such officer, soldier, sailor or airman, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine or with both. Exception.—This provision does not extend to the case in which the harbour is given by the spouse of the deserter.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
सशस्त्र बलों का अनुशासन इस बात पर निर्भर करता है कि सैनिक, नाविक और वायुसैनिक अपनी ड्यूटी-पोस्ट पर बने रहें। पलायन सैन्य तत्परता को कमजोर करता है, इसलिए औपनिवेशिक दौर के कानून (मूल रूप से भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत) ने न केवल पलायन को, बल्कि प्राधिकार से बचाने के लिए पलायनकर्ता को छिपाने में मदद करना भी अपराध ठहराया। जीवनसाथी के लिए अपवाद इस मानवीय यथार्थ को स्वीकार करता है कि पति या पत्नी से अपने ही साथी को पकड़वाने की अपेक्षा करना अक्सर अव्यावहारिक और मूल मानवीय बंधनों के विरुद्ध है—यह वैसे ही है जैसे सामान्यतः अपराधी को पनाह देने के मामलों में कुछ अपवाद मान्य होते हैं।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: केवल पलायनकर्ता को ही पलायन-संबंधी अपराधों के लिए दंडित किया जा सकता है।
तथ्य: जो लोग जान-बूझकर किसी पलायनकर्ता को छिपाने में मदद करते हैं, उन्हें भी इस धारा के तहत अलग से दंडित किया जा सकता है, भले ही उन्होंने स्वयं पलायन न किया हो।
मिथक: कोई भी पारिवारिक सदस्य जो पलायनकर्ता को शरण दे, वह अपने आप कानून के संरक्षण में आ जाता है।
तथ्य: अपवाद केवल पलायनकर्ता के जीवनसाथी (पति या पत्नी) तक सीमित है—माता-पिता, भाई-बहन या अन्य रिश्तेदार जो जान-बूझकर पलायनकर्ता को पनाह दें, उनके विरुद्ध अब भी अभियोजन चल सकता है।