Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 160
Abetment of mutiny, if mutiny is committed in consequence thereof
Whoever abets the committing of mutiny by an officer, soldier, sailor or airman, in the Army, Navy or Air Force of the Government of India, shall, if mutiny be committed in consequence of that abetment, be punished with death or with imprisonment for life, or imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
सैन्य अनुशासन वैध आदेशों के पूर्ण पालन पर टिका होता है, विशेषकर युद्ध या संकट के समय। विद्रोह — जब सशस्त्र बलों के कर्मी सामूहिक रूप से आदेश मानने से इंकार कर दें या राज्य के विरुद्ध हो जाएँ — राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा ख़तरा है। यह प्रावधान, ब्रिटिश-कालीन Indian Penal Code की धारा 131 से विरासत में मिला, का उद्देश्य केवल विद्रोहियों को ही नहीं बल्कि उन्हें उकसाने वालों को भी निरुत्साहित करना था, यह मान्यता देते हुए कि जब उकसावा सफल हो जाए तो दुरुत्साहन (उपकार अथवा प्रोत्साहन द्वारा अपराध में सहभागिता) स्वयं कृत्य जितना ही ख़तरनाक हो सकता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: केवल वे सैनिक जो विद्रोह करते हैं, इसी क़ानून के तहत दंडित किए जा सकते हैं।
तथ्य: यह प्रावधान विशेष रूप से उन नागरिकों या अन्य किसी पर केंद्रित है जो विद्रोह का अभियोजन (उकसाना या सहायता करना) करते हैं, न कि केवल उन पर जो सीधे विद्रोह में भाग लेते हैं।
मिथक: विद्रोह के लिए उकसाने पर दंड वही होता है, चाहे विद्रोह वास्तव में हो या न हो।
तथ्य: यह विशेष धारा तभी लागू होती है जब उकसावे के परिणामस्वरूप वास्तव में विद्रोह किया गया हो; असफल विद्रोह कराने के प्रयत्न या असफल अभियोजन का दंड किसी अन्य, सामान्यतः कम कठोर, प्रावधान के अंतर्गत दिया जाता है।