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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 159

Abetting mutiny, or attempting to seduce a soldier, sailor or airman from his duty

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सशस्त्र बलों में अनुशासन और निष्ठा को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य माना गया है। इतिहास में औपनिवेशिक दौर के क़ानून (जैसे Indian Penal Code की धारा 131, जिसे यह प्रावधान प्रतिस्थापित करता है) 1857 के विद्रोह और विभिन्न बगावतों के बाद इस उद्देश्य से बनाए गए थे कि बाहरी या आंतरिक लोग सैनिकों को वैध आदेश शृंखला की अवहेलना के लिए न उकसा सकें। यह प्रावधान सैन्य की अखंडता और आदेश-शृंखला की रक्षा के लिए Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में जारी है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने पूर्ववर्ती प्रावधान (Section 131 IPC) की सख्त व्याख्या की है, और उकसावे या बहकावे का जानबूझकर किया गया कृत्य साबित होना आवश्यक माना है—सिर्फ़ राजनीतिक राय जताना या नीतियों की सामान्य आलोचना पर्याप्त नहीं मानी गई, जब तक कि वह विशेष रूप से सशस्त्र बल के किसी सदस्य को कर्तव्य या निष्ठा छोड़ने के लिए लक्षित न हो। अदालतों ने इसे राजद्रोह-प्रकार के अपराधों से अलग माना है, और फोकस को व्यापक असहमति की बजाय सैन्य अनुशासन तक सीमित रखा है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कानून किसी भी व्यक्ति को दंडित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जो सेना या सरकार की आलोचना करता है।

    तथ्य: अदालतों ने सामान्यतः यह आवश्यक माना है कि अभियुक्त ने खास तौर पर सशस्त्र बल के किसी सदस्य को कर्तव्य की अवहेलना कराने या विद्रोह के लिए उकसाने की कोशिश की हो—नीतियों की सामान्य आलोचना को बगावत के लिए उकसाना (अभियोजन) नहीं माना जाता।

  • मिथक: केवल सैनिकों को ही इस कानून के तहत दंडित किया जा सकता है।

    तथ्य: यह कानून उन सब पर लागू होता है—नागरिक हों या सैन्यकर्मी—जो ऐसी अवज्ञा या विद्रोह के लिए उकसाते या प्रोत्साहित करते हैं; दंड केवल सैनिकों तक सीमित नहीं है।