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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 158

Aiding escape of, rescuing or harbouring such prisoner

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान राज्य की उस क्षमता की रक्षा करता है जिसके अंतर्गत ‘राज्य-बंदी’ (राज्य की सुरक्षा कारणों से निरुद्ध) या ‘युद्धबंदी’ (सशस्त्र संघर्ष में पकड़े गए) व्यक्तियों को हिरासत में रखा जाता है। ऐसे बंदी विशेष रूप से संवेदनशील माने जाते हैं क्योंकि उनकी अभिरक्षा का संबंध प्रायः राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा या कूटनीतिक मामलों से होता है। यह कानून निजी व्यक्तियों या अधिकारियों को भागने में सहायता, भगोड़ों को छिपाने, या पुनः गिरफ्तारी में बाधा डालने से रोकने का प्रयास करता है, क्योंकि ऐसे कृत्य सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय दायित्वों (जैसे युद्धबंदियों के लिए Geneva Conventions) या लोक-व्यवस्था को खतरे में डाल सकते हैं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कानून केवल तभी लागू होता है जब आपने बंदी को शुरू में भागने में सहायता की हो—ऐसा कहना गलत है।

    तथ्य: यह प्रावधान तब भी लागू होता है जब आप बंदी को उसके पहले ही भाग जाने के बाद शरण/छिपने की जगह देते हैं, या उसकी पुनः गिरफ्तारी का विरोध करते हैं, भले ही मूल फरारी में आपका कोई हाथ न रहा हो।

  • मिथक: पैरोल पर छोड़ा गया बंदी यदि अनुमत क्षेत्र से थोड़ा-सा बाहर चला जाए, तो इसे वास्तविक अर्थ में ‘फरार होना’ नहीं माना जाएगा—ऐसा मानना गलत है।

    तथ्य: कानून की व्याख्या स्पष्ट रूप से कहती है कि पैरोल की निर्धारित सीमाओं से बाहर जाना स्वयं वैध अभिरक्षा से फरार होना माना जाता है।