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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 152

Act endangering sovereignty, unity and integrity of India

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा भारतीय दंड संहिता का स्थान लेने वाले भारतीय न्याय संहिता, 2023 का भाग है। यह औपनिवेशिक काल की देशद्रोह संबंधी धारा (IPC धारा 124A) की जगह एक ऐसे प्रावधान से लेती है जो स्पष्ट रूप से भारत की प्रभुसत्ता, एकता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा को पृथकतावादी और विद्रोही गतिविधियों से लक्षित करता है, जबकि व्याख्यात्मक उपबंध के माध्यम से वैध राजनीतिक असहमति के लिए अधिक सशक्त सुरक्षा देने का प्रयत्न करता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

चूंकि यह 2023 का एक नया प्रावधान है, स्वयं धारा 152 की व्याख्या पर सर्वोच्च न्यायालय का कोई प्रत्यक्ष निर्णय अभी नहीं है। परंतु इसका व्याख्यात्मक उपबंध उस संरक्षण की काफ़ी हद तक अनुगूंज करता है जो सर्वोच्च न्यायालय ने पुरानी देशद्रोह धारा में Kedar Nath Singh v. State of Bihar (1962) में जोड़ा था, जहाँ न्यायालय ने कहा कि केवल सरकार की आलोचना, जब तक वह हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था भड़काती नहीं, देशद्रोह नहीं है। अपेक्षा है कि न्यायालय यहाँ भी समान तर्क अपनाएँगे—दोषसिद्धि से पहले पृथक्करण, विद्रोह या ऐसे ही कृत्यों को वास्तव में उकसाने का तत्व आवश्यक होगा; केवल तीखी या अलोकप्रिय अभिव्यक्ति पर्याप्त नहीं होगी।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा कहती है कि सरकार की कोई भी आलोचना अवैध है।

    तथ्य: व्याख्यात्मक उपबंध खास तौर पर सरकार की नीतियों या कार्यों की उस आलोचना की रक्षा करता है जो वैधानिक परिवर्तन के लिए की जाए और जिसमें पृथक्करण, विद्रोह या ऐसे ही कृत्यों को उकसाना शामिल न हो।

  • मिथक: यह पुरानी देशद्रोह धारा (IPC 124A) के समान ही है।

    तथ्य: धारा 152 ने IPC 124A का स्थान लिया है, पर इसकी संरचना भिन्न है—यह स्पष्ट रूप से पृथक्करण, सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक गतिविधियों और प्रभुसत्ता व एकता के प्रति ख़तरों पर केंद्रित है, न कि ‘देशद्रोह’ शब्द का उपयोग करते हुए या व्यापक रूप से सरकार के प्रति ‘असंतोष’ को निशाना बनाते हुए।