Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 149
Collecting arms, etc., with intention of waging war against Government of India
, with intention of waging war against Government of India.— Whoever collects men, arms or ammunition or otherwise prepares to wage war with the intention of either waging or being prepared to wage war against the Government of India, shall be punished with imprisonment for life or imprisonment of either description for a term not exceeding ten years, and shall also be liable to fine.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 122 के सार को आगे बढ़ाता है, जिसे औपनिवेशिक विधायकों ने सशस्त्र विद्रोहों और राज्य सत्ता के प्रति संगठित खतरों की चिंताओं के बीच अधिनियमित किया था। इसका लक्ष्य तैयारी के कृत्यों—लोगों, हथियारों या गोलाबारूद का इकट्ठा करना—पर है, ताकि प्राधिकार वास्तविक युद्ध या सशस्त्र विद्रोह शुरू होने से पहले ही कार्रवाई कर सकें, न कि हिंसा होने की प्रतीक्षा करें। यह प्रावधान राज्य की संप्रभुता और स्थिरता के विरुद्ध संगठित सशस्त्र खतरों पर प्रारम्भिक हस्तक्षेप के हित को दर्शाता है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
पूर्ववर्ती प्रावधान (धारा 122, आई.पी.सी.) की व्याख्या करते हुए न्यायालयों ने माना है कि ‘युद्ध छेड़ना’ का अर्थ सरकार को उखाड़ फेंकने या उसे बाध्य करने के उद्देश्य से किया गया संगठित सशस्त्र प्रयत्न है, न कि सामान्य अपराध या नागरिक अशांति। पुराने प्रावधान के अंतर्गत न्यायिक दृष्टांतों ने रेखांकित किया कि सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ने की विशिष्ट मंशा के बिना मात्र हथियार रखना इस अपराध को आकर्षित नहीं करता; अभियोजन को यह सिद्ध करना होता है कि एकत्र संसाधनों का उपयोग राज्य के विरुद्ध युद्ध-सदृश कार्रवाई में करने की योजना थी। न्यायालयों ने इसे साधारण लोक-व्यवस्था या निषिद्ध सभा जैसे कमतर अपराधों से अलग माना है, और इसे उन्हीं मामलों के लिए सुरक्षित रखा है जिनमें सरकार के विरुद्ध सशस्त्र टकराव की वास्तविक तैयारी दिखे।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: इस कानून के तहत दंडित होने के लिए आपको सचमुच सरकार से लड़ना आवश्यक है।
तथ्य: कानून तैयारी को दंडित करता है—पुरुष, हथियार या गोलाबारूद इस मंशा से इकट्ठा करना कि युद्ध छेड़ा जाएगा—भले ही युद्ध वास्तव में कभी शुरू न हो।
मिथक: सिर्फ हथियारों का मालिक होना ही इस धारा के तहत आरोप तय करने के लिए पर्याप्त है।
तथ्य: न्यायालय भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की विशिष्ट मंशा का प्रमाण मांगते हैं; ऐसी मंशा के बिना मात्र हथियार रखने से यह अपराध सिद्ध नहीं होता।