Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 145
Habitual dealing in slaves
Whoever habitually imports, exports, removes, buys, sells, traffics or deals in slaves, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term not exceeding ten years, and shall also be liable to fine.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान उस कानून को आगे बढ़ाता है जिसे सबसे पहले Indian Penal Code, 1860 में (Section 371 के रूप में) शामिल किया गया था, उस दौर में जब ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने Slavery Abolition Act, 1833 और बाद के अंतरराष्ट्रीय दासता-विरोधी आंदोलनों के बाद अपने सभी क्षेत्रों, जिनमें भारत भी शामिल था, में दासता और दास-व्यापार को औपचारिक रूप से समाप्त किया। कानून का निशाना वे लोग थे जिन्होंने दास-व्यापार को बार-बार होने वाले धंधे या जीवन-यापन का साधन बना लिया था, न कि केवल किसी एक अवैध कृत्य को; ऐसी आदतन संलिप्तता को अधिक गंभीर अपराध मानकर कठोर दंड का प्रावधान किया गया। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 ने इस प्रावधान को अधिकतर बिना बदले आगे बढ़ाया है, जिससे दासता को संस्था के रूप में भारत की दीर्घकालिक कानूनी अस्वीकृति बनी रहती है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह धारा दासता से जुड़ी किसी एकमात्र, एक-बार की घटना पर लागू होती है।
तथ्य: पाठ विशेष रूप से ‘आदतन’ व्यवहार को दंडित करता है, अर्थात दोहराए गए आचरण के पैटर्न को—आवश्यक नहीं कि एकाकी घटना को (सरलीकृत)।
मिथक: यह कानून केवल एक अप्रासंगिक ऐतिहासिक अवशेष है जो अब प्रासंगिक नहीं रहा।
तथ्य: यह Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 के तहत सक्रिय भारतीय आपराधिक क़ानून का हिस्सा बना हुआ है और आधुनिक शोषण के उन रूपों पर भी लागू हो सकता है जो दास-व्यापार से मिलते-जुलते हों।