Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 12
Limit of solitary confinement
In executing a sentence of solitary confinement, such confinement shall in no case exceed fourteen days at a time, with intervals between the periods of solitary confinement of not less duration than such periods; and when the imprisonment awarded shall exceed three months, the solitary confinement shall not exceed seven days in any one month of the whole imprisonment awarded, with intervals between the periods of solitary confinement of not less duration than such periods.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
ऐतिहासिक रूप से एकांत कारावास को साधारण कारावास पर अतिरिक्त, अधिक कठोर दंड के रूप में लगाया जाता रहा है। यह समझते हुए कि लंबा पृथक्करण गंभीर मनोवैज्ञानिक हानि पहुँचा सकता है, उन्नीसवीं सदी के भारतीय दंड कानून (मूलतः Indian Penal Code, 1860 की धारा 73–74) ने कड़े उच्चतम सीमाएँ और अनिवार्य विराम अवधियाँ निर्धारित कीं। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 ने लगभग यथावत इस सुरक्षा को आगे बढ़ाया है, ताकि वैधानिक सज़ा के भीतर एकांत कारावास लंबी, अनियंत्रित क्रूरता का रूप न ले।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
भारतीय न्यायालयों ने, विशेषकर Sunil Batra v. Delhi Administration (1978) में, एकांत कारावास की समीक्षा की और रेखांकित किया कि वैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करते हुए या बिना उचित वैधानिक प्राधिकार के दी गई लंबी एकांत स्थिति अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध संवैधानिक संरक्षणों का उल्लंघन कर सकती है। यद्यपि वह मामला मुख्यतः कारागार प्रशासन से संबंधित था, न कि ठीक इसी अनुभाग से, फिर भी उसने यह व्यापक न्यायिक दृष्टि पुष्ट की कि ऐसे प्रावधान (और उनका IPC पूर्ववर्ती) कैदियों को अत्यधिक पृथक्करण से बचाने के लिए सख्ती से पढ़े जाने चाहिए, और इन वैधानिक सीमाओं से अधिक कोई भी एकांत कारावास अवैध होगा।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि एकांत कारावास को जेल मनचाही बार और मनचाही अवधि के लिए किसी भी सज़ा के हिस्से के रूप में लागू कर सकती है।
तथ्य: कानून एकांत कारावास को प्रति चरण अधिकतम 14 दिनों तक कड़ा रूप से सीमित करता है, विश्राम-अंतराल अनिवार्य करता है, और लंबी सजाओं में प्रति माह इसे 7 दिनों तक सीमित करता है — न्यायालयों ने इन सीमाओं का अतिक्रमण अवैध माना है।
मिथक: यह सही नहीं है कि हर कारावास सज़ा में एकांत कारावास स्वाभाविक रूप से शामिल होता है।
तथ्य: एकांत कारावास स्वतः लागू नहीं होता बल्कि यह सज़ा का एक अलग, विशेष रूप से आदेशित भाग होता है; यह तभी लागू होता है जब अदालत ने इसे स्पष्ट रूप से सुनाया हो।