The Constitution of India
अनुच्छेद 97
सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते
सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते— राज्य सभा के सभापति और उपसभापति को तथा लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को, ऐसे वेतन और भत्तों का जो संसद्, विधि द्वारा, नियत करे और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसे वेतन और भत्तों का, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, संदाय किया जाएगा ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान-निर्माताओं का उद्देश्य था कि संसद के दोनों सदनों के अध्यक्षीय पदाधिकारियों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और पर्याप्त पारिश्रमिक मिले, ताकि वे कार्यपालिका पर आश्रित हुए बिना और वेतन को लेकर अनिश्चितता के बिना अपने दायित्व निभा सकें। संविधान में कठोर निश्चित रकम बाँध देने के बजाय, उन्होंने संसद को सामान्य विधि द्वारा वेतन अद्यतन करने की शक्ति दी, और साथ ही एक बैकअप व्यवस्था (द्वितीय अनुसूची) रखी ताकि यदि संसद कानून बनाने में विलंब करे तो भुगतान में कोई अंतराल न रहे।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि संविधान ने अध्यक्ष और सभापति का सटीक वेतन स्थायी रूप से तय कर दिया है।
तथ्य: संविधान केवल एक बैकअप राशि (द्वितीय अनुसूची) प्रदान करता है; वास्तविक वेतन संसद सामान्य विधि के माध्यम से कभी भी बदल सकती है।