The Constitution of India
अनुच्छेद 32A
repealedराज्य विधियों की सांविधानिक वैधता पर अनुच्छेद 32 के अधीन कार्यवाहियों में विचार न किया जाना
राज्य विधियों की सांविधानिक वैधता पर अनुच्छेद 32 के अधीन कार्यवाहियों में विचार न किया जाना ।]-संविधान (तैंतालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1977 की धारा 3 द्वारा (13-4-1978 से) लोप किया गया ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
अनुच्छेद 32A को आपातकाल के दौरान 42nd Amendment Act, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, जो न्यायिक पुनरावलोकन (judicial review) को सीमित करने और कुछ शक्तियों का केंद्रीकरण करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा था। इसका उद्देश्य अनुच्छेद 32 की कार्यवाही में सर्वोच्च न्यायालय को राज्य कानूनों की वैधता की जाँच से रोकना था, ताकि केंद्र, राज्यों और न्यायपालिका के बीच टकराव कम हो तथा ऐसे विवाद मुख्यतः उच्च न्यायालयों में सुने जाएँ। आपातकाल समाप्त होने और राजनीतिक परिस्थिति बदलने के बाद, संसद ने 43rd और 44th Amendment Acts के माध्यम से ऐसे अनेक संशोधनों को उलटते हुए सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक पुनरावलोकन की पूर्ण शक्ति बहाल कर दी।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि अनुच्छेद 32A अभी भी संविधान का हिस्सा है और वह सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों को सीमित करता है।
तथ्य: इसे 43rd Amendment Act, 1977 द्वारा पूरी तरह निरस्त कर दिया गया, जो 13 April 1978 से प्रभावी हुआ, और आज इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं है।
मिथक: यह कहना गलत है कि अनुच्छेद 32A का संबंध संघ (केंद्रीय) कानूनों से था।
तथ्य: यह विशेष रूप से राज्य के कानूनों से संबंधित था, न कि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से।