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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 326

लोक सभा और राज्यों की विधान सभाओं के लिए निर्वाचनों का वयस्क मताधिकार के आधार पर होना

लोक सभा और राज्यों की विधान सभाओं के लिए निर्वाचनों का वयस्क मताधिकार के आधार पर होना — लोक सभा और प्रत्येक राज्य की विधान सभा के लिए निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति, जो भारत का नागरिक है और ऐसी तारीख को, जो समुचित विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस निमित्त नियत की जाए, कम से कम 2अठारह वर्ष] की आयु का है और इस संविधान या समुचित विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन अनिवास, चित्तविकृति, अपराध या भ्रष्ट या अवैध आचरण के आधार पर अन्यथा निरर्हित नहीं कर दिया जाता है, ऐसे किसी निर्वाचन में मतदाता के रूप में रजिस्ट्रीकृत होने का हकदार होगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारत के संविधान-निर्माताओं ने स्वतंत्रता के समय सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार अपनाया—जब बहुत से देशों में अब भी संपत्ति, साक्षरता या लिंग के आधार पर मतदान सीमित था। उद्देश्य था राजनीतिक समानता को प्रतीकात्मक नहीं, वास्तविक बनाना, खासकर उस दौर की व्यापक निरक्षरता और गरीबी को देखते हुए। मतदान आयु मूलतः 21 वर्ष थी, जिसे 1989 में 61वां संविधान संशोधन द्वारा घटाकर 18 वर्ष किया गया ताकि अधिक युवाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके.

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने माना है कि अनुच्छेद 326 के तहत मतदान का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम जैसे चुनावी कानूनों से आकार पाता है; यह भाग III के समान लागू कराया जाने वाला मूल अधिकार नहीं है, यद्यपि यह लोकतंत्र और समानता जैसे संवैधानिक मूल्यों से प्रवाहित होता है। N.P. Ponnuswami v. Returning Officer तथा बाद के निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया कि जबकि मतदान के अधिकार का सञ्चालन सामान्य कानून से विनियमित हो सकता है, वयस्क मताधिकार और स्वतंत्र-निष्पक्ष चुनावों की आधारभूत संरचना (basic structure) संसद द्वारा छीनी नहीं जा सकती.

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: भारत में मतदान का अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसा कोई मूल अधिकार है—यह कथन सही नहीं है.

    तथ्य: न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि मतदान का अधिकार संविधान से उद्भूत और साधारण चुनावी कानूनों से संचालित होता है, पर यह भाग III के अंतर्गत मूल अधिकार नहीं है—भले ही यह भारत की लोकतांत्रिक संरचना के केन्द्रीय तत्वों में है.

  • मिथक: भारत में मतदान की आयु हमेशा से 18 वर्ष रही है—यह कथन तथ्यात्मक रूप से गलत है.

    तथ्य: मूल रूप से यह 21 वर्ष थी और 1989 में 61वें संविधान संशोधन के माध्यम से ही इसे घटाकर 18 वर्ष किया गया.