The Constitution of India
अनुच्छेद 325
धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति का निर्वाचक- नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र न होना और उसके द्वारा किसी विशेष निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने का दावा न किया जाना
धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर किसी व्यक्ति का निर्वाचक- नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र न होना और उसके द्वारा किसी विशेष निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने का दावा न किया जाना — संसद् के प्रत्येक सदन या किसी राज्य के विधान-मंडल के सदन या प्रत्येक सदन के लिए निर्वाचन के लिए प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र के लिए एक साधारण निर्वाचक-नामावली होगी और केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या इनमें से किसी के आधार पर कोई व्यक्ति ऐसी किसी नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए अपात्र नहीं होगा या ऐसे किसी निर्वाचन-क्षेत्र के लिए किसी विशेष निर्वाचक-नामावली में सम्मिलित किए जाने का दावा नहीं करेगा ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
स्वतंत्रता से पहले, ब्रिटिश शासन के अधीन भारत की चुनाव व्यवस्था में ‘अलग निर्वाचक मंडल’ (separate electorates) थे — अलग-अलग धार्मिक समुदायों (जैसे हिंदू और मुस्लिम) और अन्य समूहों के लिए अलग मतदाता सूचियाँ और आरक्षित सीटें। यह व्यवस्था Government of India Acts, 1909 और 1935 से बनी थी। इससे साम्प्रदायिक विभाजन गहरा हुआ और व्यापक रूप से माना गया कि इससे वे तनाव बढ़े जिन्होंने विभाजन को और उकसाया। संविधान सभा ने सोच-समझकर अलग निर्वाचक मंडलों को अस्वीकार किया और धर्म, जाति, नस्ल या लिंग की परवाह किए बिना सबके लिए एक एकीकृत सामान्य मतदाता सूची अपनाई, ताकि नए भारतीय लोकतंत्र में साझा नागरिकता और समानता का भाव बने।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अनुच्छेद 325 का मतलब यह है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या महिलाओं के लिए विधानसभाओं में कोई आरक्षित सीटें नहीं होतीं।
तथ्य: आरक्षित सीटें (जैसे अनुच्छेद 330 और 332 के तहत SC/ST सीटें) मान्य हैं और वे उसी एक सामान्य निर्वाचन नामावली से भरी जाती हैं — उस निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदाता, जाति की परवाह किए बिना, मिलकर आरक्षित-सीट वाले उम्मीदवार का चुनाव करते हैं। अनुच्छेद 325 अलग निर्वाचन नामावलियों पर रोक लगाता है, न कि सामान्य सूची के माध्यम से भरी जाने वाली आरक्षित सीटों पर।
मिथक: यह अनुच्छेद स्वयं मत देने के अधिकार की गारंटी देता है।
तथ्य: अनुच्छेद 325 एकीकृत, भेदभाव-मुक्त मतदाता सूची के बारे में है। मतदाता के रूप में पंजीकृत होने तथा मतदान करने का वास्तविक अधिकार मुख्यतः अनुच्छेद 326 और चुनावी क़ानूनों में विन्यस्त है।