The Constitution of India
अनुच्छेद 247
कुछ अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना का उपबंध करने की संसद् की शक्ति
कुछ अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना का उपबंध करने की संसद् की शक्ति — इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, संसद् अपने द्वारा बनाई गई विधियों के या किसी विद्यमान विधि के, जो संघ सूची में प्रगणित विषय के संबंध में है, अधिक अच्छे प्रशासन के लिए अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना का विधि द्वारा उपबंध कर सकेगी।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान का उच्च न्यायालयों पर अध्याय (भाग VI, अध्याय V) मुख्य रूप से राज्यों को राज्य-विषयों के लिए अपना न्यायालय ढांचा संगठित करने देता है। परंतु संसद द्वारा बनाए गए कुछ कानून—जैसे रक्षा, मुद्रा, या अंतर-राज्यीय व्यापार—का प्रभावी राष्ट्रीय प्रवर्तन करने हेतु विशिष्ट न्यायालयों की आवश्यकता हो सकती है। अनुच्छेद 247 संसद को ऐसे अतिरिक्त न्यायालय बनाने की एक विशेष, प्राधान्यपूर्ण शक्ति देता है, ताकि संघीय कानून उचित न्यायिक तंत्र के बिना न रह जाएँ और इसके लिए राज्य विधानमंडलों या सामान्य उच्च न्यायालयीय संरचनाओं पर निर्भर न रहना पड़े।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कथन गलत है कि अनुच्छेद 247 संसद को किसी भी उद्देश्य के लिए किसी भी प्रकार का नया न्यायालय बनाने देता है।
तथ्य: यह शक्ति केवल अतिरिक्त न्यायालय बनाने तक सीमित है ताकि संसद-निर्मित कानूनों या संघ सूची में वर्णित विषयों से संबंधित कानूनों का प्रवर्तन सुदृढ़ हो—राज्य-विषयों या सामान्य प्रयोजनों के लिए नहीं।
मिथक: यह अनुच्छेद उन अधिकरणों (ट्रिब्यूनल) के समान नहीं है जो अनुच्छेद 323A या 323B के तहत स्थापित किए जाते हैं।
तथ्य: अनुच्छेद 247 ‘न्यायालयों’ से संबंधित है, जबकि अधिकरण एक अलग व्यवस्था है जिसे पृथक संवैधानिक प्रावधानों—अनुच्छेद 323A और 323B—के तहत बनाया जाता है, और जिनकी संरचना व प्रक्रिया अक्सर भिन्न होती है।