The Constitution of India
अनुच्छेद 243V
सदस्यता के लिए निरर्हताएं
सदस्यता के लिए निरर्हताएं — (1) कोई व्यक्ति किसी नगरपालिका का सदस्य चुने जाने के लिए और सदस्य होने के लिए निरर्हित होगा, — (क) यदि वह संबंधित राज्य के विधान-मंडल के निर्वाचनों के प्रयोजनों के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस प्रकार निरर्हित कर दिया जाता है: परंतु कोई व्यक्ति इस आधार पर निरर्हित नहीं होगा कि उसकी आयु पच्चीस वर्ष से कम है, यदि उसने इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है; (ख) यदि वह राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन इस प्रकार निरर्हित कर दिया जाता है । (2) यदि यह प्रश्न उठता है कि किसी नगरपालिका का कोई सदस्य खंड (1) में वर्णित किसी निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न ऐसे प्राधिकारी को, और ऐसी रीति से, जो राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, उपबंधित करे, विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान का भाग IX-A, जो 1992 के 74वें संशोधन से जोड़ा गया, ने नगरपालिकाओं को स्थानीय स्वशासन की इकाइयों के रूप में संवैधानिक दर्जा दिया। अनुच्छेद 243V राज्य विधानमंडल चुनावों में प्रयुक्त अयोग्यता ढाँचे को अपनाकर नगरपालिका चुनावों के लिए भी विश्वसनीय पात्रता मानक सुनिश्चित करता है, साथ ही आयु सीमा घटाकर 21 करता है ताकि स्थानीय शासन में युवाओं की भागीदारी बढ़े, जिसे लोकतंत्र की पाठशाला माना जाता है। यह राज्यों को नगरपालिका-विशिष्ट अयोग्यताएँ जोड़ने की छूट भी देता है और मनमानी हटाने से बचने हेतु स्पष्ट, क़ानून-आधारित विवाद-निपटान तंत्र अनिवार्य करता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: नगरपालिका चुनावों के लिए आयु-सीमा राज्य विधानसभा चुनावों के समान ही है।
तथ्य: अनुच्छेद 243V नगरपालिकाओं की सदस्यता के लिए प्रभावी आयु-आवश्यकता को विशेष रूप से 21 वर्ष तक घटा देता है, भले ही राज्य विधानसभा चुनाव क़ानून उच्चतर आयु, जैसे 25 वर्ष, तय करता हो।
मिथक: किसी भी न्यायालय या किसी भी प्राधिकरण द्वारा यह तय किया जा सकता है कि कोई नगरपालिका सदस्य अयोग्य हो गया है या नहीं।
तथ्य: उपबंध (2) यह अनिवार्य करता है कि ऐसे विवाद केवल उसी विशिष्ट प्राधिकरण और उस प्रक्रिया द्वारा निपटाए जाएँ जिन्हें राज्य विधानमंडल क़ानून द्वारा निर्दिष्ट करे।