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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 243G

पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व

पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व— संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकेगा, जो उन्हें स्वायत्त शासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों और ऐसी विधि में पंचायतों को उपयुक्त स्तर पर, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, निम्नलिखित के संबंध में शक्तियां और उत्तरदायित्व न्यागत करने के लिए उपबंध किए जा सकेंगे, अर्थात्:— (क) आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना; (ख) आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की ऐसी स्कीमों को, जो उन्हें सौंपी जाएं, जिनके अंतर्गत वे स्कीमें भी हैं, जो ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विषयों के संबंध में हैं, कार्यान्वित करना ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

1993 से पहले पंचायतें किसी न किसी रूप में तो थीं, पर उनका संवैधानिक दर्जा या वास्तविक शक्तियाँ सुनिश्चित नहीं थीं — वे काफी हद तक राज्य सरकार की मंशा पर निर्भर रहती थीं। तिहत्तरवाँ संवैधानिक संशोधन (1992) ने विकेन्द्रीकरण को बढ़ाने के लिए विशेष रूप से भाग IX और अनुच्छेद 243G जोड़ा, जो वर्षों की बहस (गांधी के ग्राम स्वराज के दृष्टिकोण और बलवंत राय मेहता तथा अशोक मेहता समितियों जैसी सिफारिशों) के बाद आया, ताकि स्थानीय सरकार प्रतीकात्मक न रहकर सार्थक बने। इसी समय ग्यारहवीं अनुसूची भी जोड़ी गई, जिससे पंचायतों के कामकाज को ठोस विषयवस्तु मिली।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने सामान्यतः अनुच्छेद 243G को अधिकार प्रदान करने वाला (enabling) प्रावधान माना है, न कि ऐसा प्रावधान जो अपने आप शक्तियाँ हस्तांतरित कर दे — इसमें विधानमंडल ‘कर सकता है’ कहा गया है, ‘करना ही होगा’ नहीं। इसका नतीजा यह हुआ कि पंचायतों के अधिकारों की वास्तविक सीमा राज्य दर राज्य काफी भिन्न रही है, क्योंकि राज्य विधानमंडलों के पास यह विवेक बना रहता है कि ग्यारहवीं अनुसूची के किन-किन विषयों पर और कितनी शक्ति वास्तव में सौंपी जाए। न्यायिक टिप्पणियाँ अक्सर इस बात की ओर इशारा करती रही हैं कि स्वशासन की संवैधानिक परिकल्पना और राज्यों द्वारा वास्तविक विकेन्द्रीकरण की धीमी, असमान रफ्तार के बीच एक खाई बनी रही।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 243G अपने आप पंचायतों को ग्यारहवीं अनुसूची के सभी 29 विषय नहीं देता।

    तथ्य: यह अनुच्छेद केवल इतना कहता है कि राज्य विधानमंडल अपने कानूनों के माध्यम से ये शक्तियाँ सौंप सकता है — यह स्वतः हस्तांतरण नहीं करता, और वास्तव में राज्यों में सौंपे जाने की सीमा अलग-अलग है।

  • मिथक: इस अनुच्छेद के कारण पूरे भारत में पंचायतों की शक्तियाँ हर जगह एक जैसी हैं।

    तथ्य: क्योंकि विकेन्द्रीकरण प्रत्येक राज्य के अपने कानून पर निर्भर करता है, पंचायतों की वास्तविक शक्तियाँ राज्य दर राज्य काफी भिन्न होती हैं।