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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 180

अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति

अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति— (1) जब अध्यक्ष का पद रिक्त है तो उपाध्यक्ष, या यदि उपाध्यक्ष का पद भी रिक्त है तो विधान सभा का ऐसा सदस्य, जिसको राज्यपाल इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे, उस पद के कर्तव्यों का पालन करेगा । (2) विधान सभा की किसी बैठक से अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष, या यदि वह भी अनुपस्थित है तो ऐसा व्यक्ति, जो विधान सभा की प्रक्रिया के नियमों द्वारा अवधारित किया जाए, या यदि ऐसा कोई व्यक्ति उपस्थित नहीं है तो ऐसा अन्य व्यक्ति, जो विधान सभा द्वारा अवधारित किया जाए, अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

विधान सभाओं को कार्य संचालन, व्यवस्था बनाये रखने और प्रक्रिया का पालन कराने के लिए सतत नेतृत्व चाहिए। मृत्यु, त्यागपत्र या पदच्युति से उत्पन्न रिक्तियाँ, या अध्यक्ष की अस्थायी अनुपस्थिति, अन्यथा कार्यवाही रोक सकती थीं। अनुच्छेद 180, जो संसद की लोक सभा के लिए अनुच्छेद 95 का प्रतिरूप है, यह सुनिश्चित करता है कि उत्तराधिकार की स्पष्ट और सुव्यवस्थित श्रृंखला बनी रहे ताकि सभा बिना बाधा के कार्य कर सके।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: केवल उपाध्यक्ष ही कभी अध्यक्ष के रूप में कार्य कर सकता/सकती है।

    तथ्य: अनुच्छेद आगे और बैकअप की व्यवस्था देता है: यदि उपाध्यक्ष का पद भी रिक्त हो, तो राज्यपाल किसी सदस्य को नियुक्त कर सकते हैं; और यदि किसी बैठक में अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष दोनों अनुपस्थित हों, तो सभा के नियम या स्वयं सभा तय कर सकती है कि उस बैठक में अध्यक्ष के रूप में कौन कार्य करेगा।

  • मिथक: अनुच्छेद 180 लोक सभा या राज्य सभा से संबंधित है।

    तथ्य: यह अनुच्छेद विशेष रूप से राज्य की विधान सभाओं पर लागू होता है; लोक सभा के लिए समतुल्य प्रावधान अनुच्छेद 95 है।