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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 176

राज्यपाल का विशेष अभिभाषण

राज्यपाल का विशेष अभिभाषण— (1) राज्यपाल, 2विधान सभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के आरंभ में] और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में विधान सभा में या विधान परिषद् वाले राज्य की दशा में एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा और विधान-मंडल को उसके आह्वान के कारण बताएगा । (2) सदन या प्रत्येक सदन की प्रक्रिया का विनियमन करने वाले नियमों द्वारा ऐसे अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों की चर्चा के लिए समय नियत करने के लिए 3*** उपबंध किया जाएगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

अनुच्छेद 176, अनुच्छेद 87 का समकक्ष है, जो संसद और राष्ट्रपति पर लागू होता है। इसका आधार ब्रिटिश संसदीय परंपरा का ‘सिंहासन से अभिभाषण’ है, जिसमें राष्ट्रप्रमुख विधायी सत्र का औपचारिक उद्घाटन करते हैं और सरकार का कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। भारत की संसदीय प्रणाली में राज्यपाल संवैधानिक (नाममात्र) प्रमुख होते/होती हैं और राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते/करती हैं; इसलिए यह अभिभाषण वास्तव में राज्य सरकार द्वारा तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य आने वाले वर्ष या कार्यकाल के लिए सरकार की नीतियों और विधायी प्राथमिकताओं को सार्वजनिक रूप से रखना और निर्वाचित प्रतिनिधियों को उन योजनाओं पर औपचारिक बहस व परीक्षण का अवसर देना है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने सामान्यतः राज्यपाल के अभिभाषण को राज्य मंत्रिपरिषद (अनुच्छेद 163) की सलाह पर तैयार सरकारी नीतिगत वक्तव्य माना है, न कि राज्यपाल के निजी विचार। अभिभाषण की सामग्री या चूकों की न्यायिक समीक्षा विरल रही है, क्योंकि न्यायालय इस विधायिका–कार्यपालिका की प्रक्रियात्मक सीमा में दखल देने से बचते रहे हैं। कुछ उच्च न्यायालयों ने कहा है कि अभिभाषण के दौरान वॉकआउट या व्यवधान राजनीतिक रूप से महत्व रखते हैं, पर जब तक अभिभाषण हो जाता है और नियमों के अनुसार चर्चा के लिए समय दिया जाता है, तब तक मात्र उससे अनुच्छेद 176 का उल्लंघन नहीं होता।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि राज्यपाल अपना अभिभाषण अपने निजी विचारों या निर्णय के आधार पर स्वयं लिखते/लिखती हैं।

    तथ्य: राज्यपाल राज्य मंत्रिपरिषद (मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल) द्वारा तैयार भाषण को उनकी सलाह पर पढ़ते/पढ़ती हैं; यह व्यक्तिगत मतों पर नहीं, मंत्रिपरिषद की सलाह पर आधारित होता है।

  • मिथक: यह सोचना ठीक नहीं है कि राज्यपाल का अभिभाषण सिर्फ एक औपचारिकता है जिसका कोई वास्तविक प्रभाव नहीं।

    तथ्य: संविधान ने विशेष रूप से यह अपेक्षित किया है कि विधान-मंडल अभिभाषण पर औपचारिक चर्चा के लिए समय नियत करे; इसलिए यह मात्र समारोह नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित जवाबदेही तंत्र है।