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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 167

राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य

राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य— प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य होगा कि वह— (क) राज्य के कार्यों के प्रशासन संबंधी और विधान विषयक प्रस्थापनाओं संबंधी मंत्रि-परिषद् के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे; (ख) राज्य के कार्यों के प्रशासन संबंधी और विधान विषयक प्रस्थापनाओं संबंधी जो जानकारी राज्यपाल मांगे, वह दे; और (ग) किसी विषय को जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर दिया है किंतु मंत्रि-परिषद् ने विचार नहीं किया है, राज्यपाल द्वारा अपेक्षा किए जाने पर परिषद् के समक्ष विचार के लिए रखे । अध्याय 3-राज्य का विधान-मंडल साधारण

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

अनुच्छेद 167, अनुच्छेद 78 (जो संघ स्तर पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पर लागू है) का समकक्ष है और वेस्टमिंस्टर परंपरा पर आधारित है, जिसके अनुसार राष्ट्रप्रमुख भले ही औपचारिक पदाधिकारी हों, पर संवैधानिक कर्तव्यों—जैसे विधेयकों पर सहमति देना, विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग, या अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति को प्रतिवेदन करना—का समुचित निर्वाह करने हेतु सरकार के निर्णयों से अवगत रहना आवश्यक है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि राज्यपाल को राज्य प्रशासन से अलग-थलग या अनभिज्ञ न रखा जाए, जबकि वास्तविक कार्यपालिका–शक्ति मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली निर्वाचित मंत्रिपरिषद में ही निहित रहती है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने सामान्यतः माना है कि अनुच्छेद 167 राज्यपाल और मंत्रिपरिषद के बीच विश्वास व संवाद के संवैधानिक संबंध को सुदृढ़ करता है, न कि राज्यपाल को दैनिक प्रशासन में दखल देने की कोई सामान्य शक्ति देता है। राज्यपाल के विवेक (जैसे S.R. Bommai v. Union of India, 1994) से जुड़े मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने रेखांकित किया कि राज्यपाल के स्वतंत्र आकलन—जिसमें अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भी शामिल है—उद्देश्यपूर्ण सामग्री और उचित जानकारी पर आधारित होने चाहिए; यह दायित्व अनुच्छेद 167 के माध्यम से पूरा होता है क्योंकि इससे राज्यपाल अनभिज्ञ नहीं रहते। यह अनुच्छेद अपने आप में व्यापक वाद–विवाद का विषय कम रहा है, पर अक्सर अनुच्छेद 163 और 356 के साथ पढ़ा जाता है ताकि राज्यपाल–मंत्रिपरिषद संबंध स्पष्ट हो।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 167 राज्यपाल को राज्य मंत्रिमंडल के निर्णयों को नियंत्रित करने या वीटो करने की शक्ति देता है।

    तथ्य: यह अनुच्छेद केवल मुख्यमंत्री पर राज्यपाल को सूचित करने और जानकारी देने का दायित्व डालता है; यह राज्यपाल को मंत्रिपरिषद के निर्णयों को निरस्त करने का अधिकार नहीं देता।

  • मिथक: राज्यपाल इस अनुच्छेद का उपयोग करके दिन–प्रतिदिन के प्रशासन में सूक्ष्म–स्तरीय दखल दे सकते हैं।

    तथ्य: यह कर्तव्य केवल संप्रेषण और जानकारी–साझा करने तक सीमित है; वास्तविक कार्यपालिका–शक्ति अनुच्छेद 163 के तहत मंत्रिपरिषद में निहित रहती है।