The Constitution of India
अनुच्छेद 150
संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप
संघ के और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप-संघ के और राज्यों के लेखाओं को ऐसे प्ररूप में रखा जाएगा जो राष्ट्रपति, भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक 2की सलाह पर] विहित करे ।]
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
सरकारी लेखों के लिए एक समान और पारदर्शी प्रारूप जरूरी है ताकि सार्वजनिक व्यय का पता लगाया जा सके, राज्यों के बीच तुलना हो सके, और ठीक से लेखापरीक्षा हो सके। CAG भारत का स्वतंत्र लेखा परीक्षक और लेखांकन विशेषज्ञ है, इसलिए संविधान निर्माताओं ने यह अपेक्षा रखी कि प्रारूप तय करने से पहले राष्ट्रपति इस संस्था से परामर्श करें, जिससे तकनीकी दृढ़ता सुनिश्चित हो और मनमाना राजनीतिक निर्णय न हो। यह प्रावधान सार्वजनिक वित्त लेखांकन को मानकीकृत और पेशेवर निगरानी में रखने की दीर्घ परंपरा (पूर्ववर्ती Government of India Acts पर आधारित) को आगे बढ़ाता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: CAG सरकारी लेखों का प्रारूप स्वयं तय करता है।
तथ्य: रूपरेखा/प्रारूप औपचारिक रूप से राष्ट्रपति निर्धारित करते हैं; CAG केवल सलाह देता है, जिसका राष्ट्रपति को विचार करना होता है, यह बाध्यकारी निर्णय नहीं है।
मिथक: राज्य अपने-अपने अलग लेखा प्रारूप चुन सकते हैं।
तथ्य: उसी अनुच्छेद के तहत संघ और प्रत्येक राज्य—दोनों पर—राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित प्रारूप का पालन करना अनिवार्य है, जिससे एकरूपता सुनिश्चित होती है।