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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 498

repealed

Enticing or taking away or detaining with criminal intent a married woman

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान वैवाहिक संबंध की रक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था—ऐसे तृतीय पक्षों को दंडित करने के लिए जो किसी विवाहित स्त्री को उसके पति से बहला-फुसलाकर, छिपाकर या रोककर रखते हैं ताकि अनैतिक (illicit) यौन संबंध स्थापित हो सके। अब निरस्त व्यभिचार प्रावधान की तरह, यह विवाह के उस पुराने दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें पत्नी की आवाजाही और मेलजोल पर पति के नियंत्रण को एक विधिक हित माना गया; इसी कारण इसकी आलोचना भी हुई है कि यह स्त्रियों को स्वायत्त व्यक्तियों के बजाय स्वामित्व की वस्तु समझता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा उस विवाहित स्त्री को दंडित करती है जो अपने पति को छोड़ देती है।

    तथ्य: यह धारा उस व्यक्ति को दंडित करती है जो निर्दिष्ट नीयत से स्त्री को फुसलाता, दूर ले जाता, छिपाता या रोके रखता है; यह स्त्री के अपने निर्णय—घर छोड़ने—को अपराध नहीं ठहराती।