Indian Penal Code, 1860
धारा 492
repealedBreach of contract to serve at distant place to which servant is conveyed at master
Repealed by the Workmen’s Breach of Contract (Repealing) Act, 1925 (3 of 1925), S. 2 and Sch.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
धारा 492 मूल रूप से उस नौकर/कर्मचारी को दंडित करती थी जो नियोक्ता के खर्चे पर दूरस्थ कार्यस्थल तक पहुँचाए जाने के बाद सेवा देने से इन्कार कर दे या भाग जाए। धारा 490 की तरह, यह औपनिवेशिक दौर की वह सोच दर्शाती थी जिसमें श्रम अनुबंधों को लागू कराने और नियोक्ता द्वारा पुनर्वास पर खर्च करने के बाद मज़दूरों के चले जाने को रोकने हेतु आपराधिक दंड का उपयोग किया जाता था। 1925 में इस दृष्टिकोण को अस्वीकार कर दिया गया, जब श्रम-संबंधी विवादों को स्पष्ट रूप से दीवानी क़ानून के दायरे में ला दिया गया।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कथन गलत है—नियोक्ता अब किसी स्थानांतरित कर्मचारी के नौकरी छोड़ देने पर पुलिस से आपराधिक मुकदमा नहीं चलवा सकते।
तथ्य: यह धारा 1925 में निरस्त कर दी गई थी; अब ऐसे विवाद शुद्ध रूप से दीवानी या श्रम-क़ानून के विषय हैं, आपराधिक अपराध नहीं।