Skip to content
सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 489A

repealed

Counterfeiting currency-notes or bank-notes

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा 1899 में भारतीय दंड संहिता (IPC) में तब जोड़ी गई जब काग़ज़ी मुद्रा प्रचलन में आम हो गई, ताकि विशेष रूप से नोटों की जालसाजी पर रोक लगाई जा सके (पहले IPC के उपबंध मुख्यतः सिक्कों की जालसाजी से सम्बद्ध थे)। नक़ली मुद्रा पूरी अर्थव्यवस्था और स्वयं धन में जनता के विश्वास को खतरे में डालती है, इसलिए नोटों की जालसाजी संहिता में सबसे कड़े दंडनीय अपराधों में से एक है, जो अत्यंत गंभीर अपराधों की श्रेणी के समान है। IPC को 1 July 2024 को निरस्त कर भारतीय न्याय संहिता, 2023 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, और अब ये अपराध उसी के अधीन विनियमित होते हैं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: केवल वही व्यक्ति दंडनीय नहीं है जो बहुत बड़ी मात्रा में नक़ली मुद्रा छापे या अकेले पूरा प्रोसेस पूरा कर ले।

    तथ्य: जान-बूझकर जालसाजी की प्रक्रिया का सिर्फ़ कोई एक हिस्सा — जैसे विशेष कागज़ जुटाना या प्रिंटिंग करना — करना भी पर्याप्त है, ऑपरेशन के पैमाने की परवाह किए बिना।