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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 464

repealed

Making a false document

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

पिछले खंड में परिभाषित कूटकरण (Forgery) पूरी तरह इस बात पर निर्भर है कि ‘झूठा दस्तावेज़ बनाना’ किसे कहा जाता है; इसलिए यह खंड वही निर्णायक परिभाषा देता है—जैसे किसी दूसरे के नाम से झूठा दावा करते हुए दस्तावेज़ तैयार करना, किसी वास्तविक दस्तावेज़ में बेईमानी से फेरबदल करना, या छल से हस्ताक्षर प्राप्त करना। यह सूक्ष्मता ज़रूरी है, क्योंकि कूटकरण के मामलों में अक्सर निर्णायक प्रश्न यही होता है कि आरोपी का विशेष आचरण क़ानूनी रूप से ‘झूठा दस्तावेज़ बनाना’ ठहरता है या नहीं।