Skip to content
सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 423

repealed

Dishonest or fraudulent execution of deed of transfer containing false statement of consideration

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

संपत्ति के हस्तांतरण वाले दस्तावेज़ पारदर्शिता के लिए प्रतिफल (अदा की गई कीमत) और वास्तविक हितग्राही के सही उल्लेख पर निर्भर करते हैं, विशेषकर कर प्रयोजनों, देनदारों के दावों और विधिक स्वामित्व के संदर्भ में। यह धारा ऐसे दस्तावेज़ों में बेईमानी से झूठ घुसाने वालों को दंडित करती है, क्योंकि कपटपूर्ण बैनामे देनदारों को ठगने, कर से बचने, या न्यायालयों व प्राधिकरणों से वास्तविक स्वामित्व छिपाने के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। भारतीय दंड संहिता के स्थान पर लागू भारतीय दंड विधान के समकक्ष के रूप में भारत का “भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023)” में यह धारा Section 320 से मेल खाती है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालय देखते हैं कि क्या दस्तावेज़ में प्रतिफल के भुगतान या वास्तविक हितग्राही के संबंध में प्रत्यक्ष रूप से असत्य कथन है, और क्या दस्तावेज़ निष्पादित/हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति ने बेईमानी या कपट की नीयत से ऐसा किया, जो प्रायः देनदारों को विफल करने या वास्तविक स्वामित्व छिपाने के प्रयासों से जुड़ा होता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: सिर्फ वही क्रेता या विक्रेता जिसे झूठे दस्तावेज़ से लाभ हुआ हो, दंडित किया जा सकता है।

    तथ्य: यह धारा किसी भी ऐसे व्यक्ति को दंडित करती है जो बेईमानी से ऐसे दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करे, उसे निष्पादित करे, या उसका पक्षकार बने—जिसमें वे गवाह या सहयोगी भी शामिल हो सकते हैं जो जानते-बूझते इस कपट में भाग लेते हैं।