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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 411

repealed

Dishonestly receiving stolen property

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा केवल चोरों को ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी दंडित करके चोरी के माल के बाजार को हतोत्साहित करती है जो जानबूझकर चोरी की संपत्ति खरीदते या अपने पास रखते हैं। ऐसी व्यवस्था न होने पर चोर इच्छुक खरीदारों के माध्यम से चोरी के माल से आसानी से लाभ कमा लेते; इसलिए कानून चोरी-संबंधी अपराध की मांग-पक्ष को भी निशाना बनाता है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 के अंतर्गत इसका समकक्ष Section 317(2) है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों का लगातार मत रहा है कि मात्र चोरी की संपत्ति का कब्जा पर्याप्त नहीं है; अभियोजन को यह सिद्ध करना होता है कि अभियुक्त को या तो माल के चोरी होने का ज्ञान था या परिवेशगत परिस्थितियों—जैसे असामान्य रूप से कम कीमत, बिक्री की संदिग्ध परिस्थितियाँ, या विक्रेता का आचरण—के आधार पर ऐसा विश्वास करने का कारण था।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: आप तभी दोषी नहीं होते जब वस्तु आपने स्वयं चुराई हो।

    तथ्य: इस धारा के तहत आप मात्र इस आधार पर भी दोषी ठहराए जा सकते हैं कि आपने चोरी की संपत्ति को यह जानते या संदेह करते हुए प्राप्त किया या अपने पास रखा कि वह चोरी की है, भले ही चोरी किसी और ने की हो।