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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 410

repealed

Stolen property

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा उन लोगों के अभियोजन हेतु आवश्यक विधिक परिभाषा उपलब्ध कराती है जो विभिन्न संपत्ति-अपराधों से प्राप्त संपत्ति के साथ लेन-देन करते हैं, क्योंकि अलग धाराएँ चोरी की संपत्ति को प्राप्त करने या उससे लेन-देन करने को दंडित करती हैं। यह स्पष्ट करती है कि ‘चोरी की संपत्ति’ की संज्ञा वस्तुओं के अवैध अधिग्रहण के व्यापक तरीकों को समेटती है, केवल संकीर्ण अर्थ की चोरी तक सीमित नहीं, और यह भी स्पष्ट करती है कि कब किसी संपत्ति से वह कलंकित स्थिति विधिपूर्वक समाप्त हो जाती है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) में इसका समतुल्य धारा 317 है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें इसे एक परिभाषात्मक धारा मानती हैं जो आगे की धाराओं में ‘बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना’ जैसे अपराधों की नींव रखती है। वे देखते हैं कि अभिरक्षा की शृंखला से क्या यह सिद्ध होता है कि संपत्ति का स्रोत चोरी, जबरन वसूली, डकैती, आपराधिक कपटपूर्वक दुरुपयोग या न्यासभंग से था, और क्या आरोपित अपराध से पहले वह संपत्ति विधिसम्मत दावेदार को लौट चुकी थी।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: केवल वही वस्तुएँ जो शारीरिक रूप से चोरी से ली गई हों, ‘चोरी की संपत्ति’ मानी जाती हैं।

    तथ्य: परिभाषा में वे संपत्तियाँ भी आती हैं जो जबरन वसूली, डकैती, आपराधिक कपटपूर्वक दुरुपयोग, या आपराधिक न्यासभंग के माध्यम से ली गई हों।