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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 408

repealed

Criminal breach of trust by clerk or servant

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

नियोक्ता प्रायः अपने लिपिकों और नौकरों को उनके कर्तव्यों के हिस्से के रूप में नकदी, माल या अभिलेखों तक पहुँच देते हैं। यह धारा मूल अपराध की तुलना में कड़ी सज़ा देती है क्योंकि ऐसे कर्मचारी विशेष रूप से रोजगार-संबंध (employment relationship) के कारण विश्वस्त किए जाते हैं, और उस विश्वास का दुरुपयोग नियोक्ता के व्यवसाय तथा रोजगार संबंधों में आवश्यक व्यापक विश्वास को गंभीर रूप से क्षति पहुँचा सकता है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत यह धारा 316(3) के अनुरूप है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें इस बात के प्रमाण तलाशती हैं कि आरोपी लिपिक या नौकर के पद पर था और संपत्ति का सुपुर्दगीकरण विशेष रूप से उसी रोजगार-भूमिका से उत्पन्न हुआ था; यही कारण उन्नत दंड का औचित्य सिद्ध करता है, जबकि सामान्य अपराध पर धारा 406 लागू होती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: किसी भी कर्मचारी द्वारा की गई हर चोरी इस धारा के अंतर्गत आती है।

    तथ्य: यह धारा विशेष रूप से यह अपेक्षा करती है कि संपत्ति व्यक्ति को लिपिक या नौकर की भूमिका के कारण ही सौंपी गई हो; मात्र इतना पर्याप्त नहीं है कि वह कर्मचारी था और उसने अपनी ड्यूटी से असंबद्ध कोई वस्तु चुरा ली।