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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 407

repealed

Criminal breach of trust by carrier, etc.

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा मानती है कि वाहक, घाट-प्रभारी और गोदाम-पाल विशेष विश्वासी भूमिका में होते हैं, क्योंकि ग्राहक एक बार माल परिवहन या भंडारण के लिए सौंप देने के बाद उसकी निगरानी करने की बहुत कम क्षमता रखते हैं। चूँकि ऐसे पेशेवर अभिरक्षकों द्वारा दुरुपयोग से गंभीर वाणिज्यिक क्षति हो सकती है, इसलिए कानून सामान्य विश्वासघात अपराध की तुलना में कड़ा दंड निर्धारित करता है। भारतीय दंड संहिता के स्थान पर आए भारतीय दंड विधान—भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita), 2023 में यह धारा 316(3) के अनुरूप है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें यह प्रमाण चाहती हैं कि आरोपी का विशेष पेशेवर संबंध था—अर्थात् वह वाहक, घाट-प्रभारी या गोदाम-पाल के रूप में कार्य कर रहा था—और इसके साथ ही सौंपे जाने तथा बेईमान हड़प/दुरुपयोग के मानक तत्त्व भी सिद्ध हों। यही बात इसे धारा 406 के सामान्य अपराध से अलग करती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा किसी भी ऐसे कर्मचारी पर लागू होती है जो माल के साथ अनुचित व्यवहार करता है।

    तथ्य: यह विशेष रूप से उन व्यक्तियों पर लागू होती है जिन्हें उनकी पेशेवर क्षमता में वाहक, घाट-प्रभारी या गोदाम-पाल के रूप में संपत्ति सौंपी गई हो।