Indian Penal Code, 1860
धारा 40
repealedOffence
Except in the Chapters and sections mentioned in clauses 2 and 3 of this section, the word “offence” denotes a thing made punishable by this Code.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
भारतीय दंड संहिता में ‘अपराध’ शब्द सर्वत्र आता है, पर कभी‑कभी उसे अपने अलावा अन्य क़ानूनों के अधीन दंडनीय अन्यायों के बारे में भी बोलना पड़ता है — जैसे जब कोई विशेष या स्थानीय क़ानून के अंतर्गत अवैध किसी कृत्य के करने के लिए उकसाता है या षड्यंत्र करता है। धारा 40 को इसलिए गढ़ा गया कि एक डिफ़ॉल्ट अर्थ तय हो (‘अपराध’ = भारतीय दंड संहिता के अधीन दंडनीय), और साथ ही यह भी कि कुछ विशिष्ट प्रावधान (मुख्यतः उकसावे और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित) आवश्यकतानुसार परिभाषा का विस्तार कर सकें, ताकि वे तब भी कारगर रहें जब आधारभूत अवैध कृत्य भारतीय दंड संहिता के बाहर का हो।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने सामान्यतः धारा 40 को परिभाषात्मक सहायक के रूप में माना है, न कि स्वायत्त दायित्व का स्रोत। न्यायिक चर्चा प्रायः उकसावे (अध्याय V) और आपराधिक षड्यंत्र (धारा 120A/120B) के संदर्भ में उभरती है, जहाँ अदालतों को यह तय करना होता है कि ‘अपराध’ जिसके बारे में उकसावा या षड्यंत्र हुआ, वह केवल भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत होना चाहिए या किसी अन्य क़ानून के अंतर्गत भी हो सकता है, और इसके लिए धारा 40 की उपधाराएँ 2 और 3 द्वारा संकेतित विस्तृत अर्थ लागू किए जाते हैं।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: ‘अपराध’ का अर्थ हमेशा केवल भारतीय दंड संहिता में सूचीबद्ध अपराध ही होता है।
तथ्य: कुछ अध्यायों में (धारा 40 की उपधाराएँ 2 और 3 द्वारा रेखांकित, मुख्यतः उकसावे और षड्यंत्र से संबंधित) ‘अपराध’ में वे कृत्य भी शामिल हो सकते हैं जो अन्य क़ानूनों के अधीन दंडनीय हैं, न कि केवल भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत।