Indian Penal Code, 1860
धारा 374
repealedUnlawful compulsory labour
Whoever unlawfully compels any person to labour against the will of that person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारा सामान्य रूप में जबरन श्रम को अपराध घोषित करती है और व्यक्ति की यह मूल स्वतंत्रता सुरक्षित करती है कि वह काम करना चाहता है या नहीं और किसके लिए करना चाहता है। ऐतिहासिक रूप से बंधुआ मज़दूरी और जबरन दास्यता की चिंताओं से जुड़ी रही यह व्यवस्था एक न्यूनतम संरक्षण देती है; हालांकि आज की व्यवहार में, अधिक गंभीर या संगठित जबरन श्रम के मामले प्रायः व्यापक मानव-तस्करी संबंधी प्रावधानों या बंधुआ मज़दूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम जैसे विशिष्ट श्रम क़ानूनों के तहत चलाए जाते हैं। भारतीय न्याय संहिता, 2023 में अवैधानिक रूप से बाध्यकारी श्रम के विरुद्ध इसी प्रकार का प्रावधान बना हुआ है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतें यह परखती हैं कि ‘बाध्य करना’ सचमुच अवैधानिक था या नहीं, क्योंकि विधिसम्मत दायित्व—जैसे अदालत द्वारा आदेशित सामुदायिक सेवा या कुछ संविदात्मक कार्य दायित्व—इस धारा के दायरे में नहीं आते; केंद्र बिंदु ऐसे दबाव पर है जिसका कोई कानूनी आधार न हो।