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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 366

repealed

Kidnapping, abducting or inducing woman to compel her marriage, etc.

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान महिलाओं की विवाह संबंधी स्वायत्तता और देहगत अखंडता की रक्षा करता है, और जबरन विवाह तथा यौन शोषण हेतु अपहरण की ऐतिहासिक तथा चलती आ रही समस्या को संबोधित करता है। यह प्रत्यक्ष अभिप्राय के साथ‑साथ केवल ऐसे परिणाम की संभाव्यता के ज्ञान को भी दंडनीय ठहराता है, जिससे संरक्षण का दायरा व्यापक होता है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 भी जबरन विवाह या अवैध सहवास के उद्देश्य से महिला के अपहरण/बहला‑फुसलाकर ले जाने को अपराध मानती है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने माना है कि यदि बाद में महिला परिवार या सामाजिक दबाव में विवाह के लिए सहमत होती दिखाई दे, तब भी यदि उसे प्रारंभ में इस अभिप्राय से या इस संभाव्यता के ज्ञान के साथ ले जाया गया था कि उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह के लिए मजबूर किया जाएगा या यौन शोषण किया जाएगा, तो अपराध पूर्ण हो जाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यदि बाद में महिला विवाह के लिए सहमत प्रतीत हो, तो कोई अपराध नहीं हुआ।

    तथ्य: यदि उसे प्रारंभ में ही उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह या यौन संबंध के लिए मजबूर करने के अभिप्राय से ले जाया गया था, तो बाद में दबाव या अलग‑थलग कर प्राप्त किसी भी सहमति की आभा के बावजूद अपराध पूर्ण हो जाता है।