Indian Penal Code, 1860
धारा 357
repealedAssault or criminal force in attempt wrongfully to confine a person
Whoever assaults or uses criminal force to any person, in attempting wrongfully to confine that person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारणा उन मामलों को समेटती है जहाँ किसी को अवैध रूप से बंदी बनाने के प्रयास में शारीरिक बल या हमला शामिल हो, भले ही वास्तविक बंदीकरण अंततः न हो पाए। यह सुनिश्चित करती है कि असफल या बाधित बंदीकरण प्रयास के दौरान किया गया हिंसक कृत्य अलग से दंडनीय रहे।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यदि व्यक्ति बंदी बनाए जाने से पहले ही बच निकल जाता है, तो कोई अपराध नहीं होता—यह कथन ग़लत है।
तथ्य: किसी को बंदी बनाने के प्रयास के दौरान किया गया बल प्रयोग या हमला, यह धारा के तहत स्वयं दंडनीय है, भले ही बंदी बनाने का प्रयास सफल हो या न हो।