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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 354

repealed

Assault or criminal force to woman with intent to outrage her modesty

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान महिलाओं की शारीरिक गरिमा और अखंडता को उन यौन आक्रमणों से सुरक्षा देता है जो बलात्कार जैसे अधिक गंभीर अपराधों में नहीं आते। इसमें न्यूनतम अनिवार्य सजा निर्धारित है, जो यह दर्शाती है कि अवांछित शारीरिक संपर्क द्वारा महिला की गरिमा के उल्लंघन को कानून कितनी गंभीरता से लेता है। वर्ष 2024 के बाद, यह अपराध भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 74 के अंतर्गत आता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने माना है कि ‘लज्जा’ स्त्री-लिंग से जुड़ी एक विशेषता है, आयु की परवाह किए बिना; और मुख्य प्रश्न यह होता है कि क्या संबंधित कृत्य, प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर, किसी भी समझदार व्यक्ति की दृष्टि में ऐसी प्रकृति का था जो किसी महिला की शालीनता-बोध को झकझोर सके, न कि किसी कठोर सूत्र के आधार पर। सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया है कि इरादा और संभावित लज्जा-भंग का ज्ञान—दोनों में से कोई एक भी—स्वतंत्र रूप से अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हो सकता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: पीड़िता के वस्त्र या व्यवहार यह निर्धारित करने में प्रासंगिक हैं कि उसकी लज्जा भंग हुई या नहीं।

    तथ्य: न्यायालयों ने यह ठहराया है कि अपराध सिद्ध होने का आधार अभियुक्त के कृत्य और उसका इरादा या संभावित लज्जा-भंग का ज्ञान है, न कि पीड़िता के वस्त्र या आचरण।