Skip to content
सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 349

repealed

Force

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह आगे आने वाले आक्रामकता (असॉल्ट) और दंडनीय बल से संबंधित प्रावधानों में प्रयुक्त एक आधारभूत परिभाषा है। ‘बल’ को अनुभूत होने योग्य गति/संपर्क कराने के रूप में सटीक परिभाषित करके, विधि बिना रोज़मर्रा की हिंसा के भी शारीरिक बल के घटित होने की पहचान हेतु एक स्पष्ट तकनीकी आधार निर्मित करती है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने इस परिभाषा को व्यापक रूप से लागू किया है, यह मानते हुए कि परोक्ष बल—जैसे किसी वस्तु या द्रव्य को इस प्रकार किसी व्यक्ति से स्पर्श कराना कि वह महसूस हो—भी बल के प्रयोग में आता है, न कि केवल प्रत्यक्ष शारीरिक प्रहार।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि बल का प्रयोग हमेशा किसी को शारीरिक रूप से प्रहार करना ही होता है।

    तथ्य: इस परिभाषा के अंतर्गत, बल में वह स्थिति भी शामिल है जब किसी भी प्रकार की गति—चाहे परोक्ष ही क्यों न हो, जैसे पानी, कोई वस्तु या धूल—किसी व्यक्ति को, या उसके पहने हुए या उठाए/धरे हुए सामान को, इस तरह स्पर्श करे कि वह उसे महसूस कर सके।