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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 322

repealed

Voluntarily causing grievous hurt

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा धारा 321 में दी गई परिभाषा को आगे बढ़ाकर अधिक गम्भीर श्रेणी, यानी गंभीर चोट, तक विस्तृत करती है, और यह अपेक्षा रखती है कि अभिप्रेत/पूर्वानुमेय हानि तथा वास्तव में हुई हानि—दोनों ‘गंभीर’ स्तर तक पहुँचें, जैसा कि धारा 320 में विशिष्ट रूप से परिभाषित है। यह सटीक परिभाषात्मक कड़ी सुनिश्चित करती है कि गंभीर चोट के लिए बाद की धाराओं, जैसे धारा 325 और 326, में निर्धारित कठोर दंड तभी लागू हों जब मानसिक अवस्था और वास्तविक परिणाम—दोनों—इस ऊँची कसौटी को पूरा करें। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत, यह परिभाषा धारा 117(1) में यथावत रखी गई है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें अभियोजन से दोनों तत्व एक साथ सिद्ध कराने की अपेक्षा करती हैं: कि अभियुक्त ने ऐसा इरादा किया था या जानता था कि उसका कृत्य धारा 320 में सूचीबद्ध प्रकार की चोट पहुँचाने की संभावना रखता है, और यह कि वास्तव में पहुँची चोट भी उसी सूची में आती है; यदि वास्तविक चोट गंभीर से कम हो, तो यह धारा लागू नहीं होती, चाहे गंभीर हानि का इरादा रहा हो।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यदि किसी ने गंभीर चोट पहुँचाने का इरादा किया था, पर वास्तव में केवल साधारण/हल्की चोट ही हुई, तब भी यह धारा लागू होती है।

    तथ्य: इस धारा के लागू होने हेतु आवश्यक है कि अभिप्रेत या पूर्वानुमेय हानि तथा वास्तव में हुई हानि—दोनों—धारा 320 में दी गई गंभीर चोटों की विशिष्ट सूची के अंतर्गत आती हों।