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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 319

repealed

Hurt

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा ‘चोट’ की मूल कानूनी परिभाषा देती है, जो भारतीय दंड संहिता में दूसरों को शारीरिक हानि से संबंधित अपराधों की पूरी शृंखला—हल्की चोट से लेकर गंभीर हानि तक—का आधार है। शब्द की सटीक परिभाषा से कानून हानि की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार अपराधों व दंडों की श्रेणियाँ बना पाता है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 में यह परिभाषा धारा 114 में यथावत रखी गई है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने ‘चोट’ की व्याख्या व्यापक रूप से की है, जिसमें केवल कटना या सूजन जैसे दिखने वाले घाव ही नहीं, बल्कि रोग उत्पन्न करना या शारीरिक अथवा मनोदैहिक निर्बलता भी शामिल है—जब तक वह शारीरिक पीड़ा, रोग या निर्बलता से संबंधित हो, मात्र भावनात्मक कष्ट से नहीं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: ‘चोट’ का मतलब केवल कट, सूजन या हड्डी टूटने जैसे दिखने वाले घाव नहीं होता।

    तथ्य: ‘चोट’ की परिभाषा व्यापक है—किसी व्यक्ति को हुई कोई भी शारीरिक पीड़ा, रोग, या निर्बलता इसमें आती है, भले ही कोई दिखने वाला घाव न हो।