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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 31

repealed

A will

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

आईपीसी में वसीयत से संबंधित कई अपराध निर्धारित हैं—जैसे वसीयत की जालसाजी करना, वसीयत को छलपूर्वक नष्ट या छिपाना, या बेइमानी से झूठी वसीयत बनाना (वसीयतनामा दस्तावेजों से संबंधित जालसाजी और धोखाधड़ी वाले प्रावधान देखें)। यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसे अपराध हर प्रकार के वसीयतनामा कागज़ पर लागू हों—सिर्फ उन पर नहीं जिन पर औपचारिक रूप से ‘वसीयत’ लिखा हो—संहिता में यह परिभाषात्मक उपबंध जोड़ा गया। इससे न्यायालय ‘वसीयत’ शब्द को व्यापक अर्थ में पढ़ते हैं, ताकि जो भी दस्तावेज वसीयतनामे का कार्य करता हो, उसका नाम कुछ भी हो, वह इसके दायरे में आए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: कानून के तहत ‘वसीयत’ तभी मान्य है जब वह औपचारिक, टाइप की हुई और वकील द्वारा तैयार की गई दस्तावेज हो—यह कथन गलत है।

    तथ्य: धारा 31 आईपीसी के अनुसार, कोई भी वसीयतनामा दस्तावेज—यहाँ तक कि संपत्ति के बारे में अंतिम इच्छाएँ बताने वाली साधारण हस्तलिखित पर्ची भी—संहिता के प्रयोजनों के लिए ‘वसीयत’ मानी जा सकती है।