Indian Penal Code, 1860
धारा 299
repealedCulpable homicide
Whoever causes death by doing an act with the intention of causing death, or with the intention of causing such bodily injury as is likely to cause death, or with the knowledge that he is likely by such act to cause death, commits the offence of culpable homicide.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारा ‘दोषपूर्ण हत्या’ की व्यापक श्रेणी बताकर संहिता में सभी मानवहत्या सम्बन्धी अपराधों की बुनियाद रखती है; इसी के आधार पर इसे आगे अधिक उग्र रूप ‘हत्या’ और कम उग्र रूप ‘हत्या न ठहरने वाली दोषपूर्ण हत्या’ में बाँटा जाता है, जिसका निर्धारण आशय या ज्ञान की तीव्रता पर निर्भर करता है। यह परिभाषा ठीक से समझना आवश्यक है, क्योंकि हर मानवहत्या के मामले में पहले यही देखा जाता है कि तथ्य इस परिभाषा में आते भी हैं या नहीं। ‘Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023’ के अंतर्गत यह अपराध पुनः क्रमांकित धारा में जारी है, और हत्या/दोषपूर्ण‑हत्या का भेद वस्तुतः यथावत बना रहा है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतें इस धारा को समझाने के लिए लंबे समय से एक क्लासिक उदाहरण देती रही हैं: कोई व्यक्ति डंडे से किसी को शरीर के गैर–महत्वपूर्ण भाग पर मारता है, और न उसे मारने का आशय है, न उसे यह ज्ञान है कि मृत्यु संभावित है; तो दोषपूर्ण हत्या तभी बनेगी जब वास्तव में मृत्यु हो जाए और संभावित मृत्यु के संबंध में कुछ आशय या ज्ञान सिद्ध हो सके; जहाँ उस कृत्य से मृत्यु की संभावना ही न के बराबर हो, वहाँ दोषपूर्ण हत्या नहीं, बल्कि केवल ‘चोट पहुँचाना’ जैसे कम गंभीर अपराध की बात हो सकती है। मात्र मृत्यु का कारण बनना और ‘दोषपूर्ण हत्या’ बनना—इनके बीच आशय या ज्ञान पर आधारित यह भेद, दुर्घटना और अपराध को अलग करने में न्यायालयों के लिए केन्द्रीय रहा है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: केवल वास्तव में किसी को मारने का आशय होना ही उसकी मृत्यु को अपराध बना सकता है।
तथ्य: यह धारा उन स्थितियों को भी समेटती है जहाँ व्यक्ति का उद्देश्य ऐसी गंभीर चोट पहुँचाना था जिससे मृत्यु की संभावना थी, या जहाँ उसे मात्र यह ज्ञान था कि उसका कृत्य मृत्यु की संभावना उत्पन्न करता है, भले ही उसे मारने की इच्छा न हो।