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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 279

repealed

Rash driving or riding on a public way

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सड़कें साझा सार्वजनिक स्थल हैं, और लापरवाह ड्राइविंग से केवल चालक ही नहीं, वहां मौजूद सभी लोग खतरे में पड़ते हैं। यह धारा किसी दुर्घटना के होने से पहले ही खतरनाक ड्राइविंग को अपराध ठहराने के लिए बनाई गई थी — स्वयं जोखिम ही अपराध है। यह ट्रैफिक व्यवहार की रोज़मर्रा की पुलिसिंग में सबसे अधिक प्रयुक्त धाराओं में से एक है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) के तहत यह अपराध पुनर्संख्या के साथ जारी है और प्रायः लाइसेंसिंग व वाहन-विशिष्ट दंडों के लिए मोटर वाहन अधिनियम के साथ मिलाकर पढ़ा जाता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने माना है कि लापरवाह या उपेक्षापूर्ण ड्राइविंग का आकलन वाहन की चाल-ढंग और उससे उत्पन्न परिवेशगत जोखिम से किया जाता है, केवल गति से नहीं; भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में धीमी गति से भी असावधानी से चलाना लापरवाह हो सकता है, और मात्र दुर्घटना घट जाना, बिना लापरवाही या उपेक्षा के प्रमाण के, दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: इस धारा के लागू होने के लिए किसी का वास्तव में घायल होना या मृत्यु होना आवश्यक है।

    तथ्य: जैसे ही वाहन चलाने का ढंग इतना लापरवाह या उपेक्षापूर्ण हो कि जीवन को खतरा उत्पन्न हो या चोट का जोखिम बने, अपराध पूर्ण हो जाता है; वास्तविक चोट लगना आवश्यक नहीं है।