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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 200

repealed

Using as true such declaration knowing it to be false

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय कानून कुछ लिखित घोषणाओं को (धारा 199 IPC तथा संबंधित दाण्डिक/प्रक्रियात्मक प्रावधानों के अंतर्गत) कुछ विधिक या शासकीय प्रक्रियाओं में शपथबद्ध मौखिक साक्ष्य के स्थान पर मान्यता देता है। चूँकि ऐसी घोषणाएँ शपथ के तहत दिए गए साक्ष्य के समान महत्त्व रखती हैं, इसलिए किसी व्यक्ति द्वारा जानी-बूझी झूठी घोषणा को असली बताकर उपयोग करने पर समतुल्य दंड की आवश्यकता थी। धारा 200 इस कमी को दूर करती है—झूठी घोषणा का दुरुपयोग करना उतना ही गंभीर अपराध मानती है जितना शपथ लेकर झूठ बोलना, जिससे प्रत्यक्ष गवाही के स्थानापन्न दस्तावेज़ों पर विश्वास बना रहता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा किसी भी झूठे कथन या दस्तावेज़ पर लागू होती है।

    तथ्य: यह केवल उन विशिष्ट ‘घोषणाओं’ पर लागू होती है जिन्हें कानून (धारा 199 IPC और संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत) शपथ के तहत दी गई गवाही के समकक्ष मानता है—साधारण झूठे बयानों पर नहीं।

  • मिथक: सिर्फ घोषणा में की गई भूल भी इस कानून के तहत दंडनीय है।

    तथ्य: व्यक्ति का ‘भ्रष्ट मन से’ और ‘जान-बूझकर’ कार्य करना आवश्यक है—अर्थात उसे मालूम हो कि घोषणा किसी महत्वपूर्ण हिस्से में असत्य है; मात्र भूल-चूक इसमें शामिल नहीं है।