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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 190

repealed

Threat of injury to induce person to refrain from applying for protection to public servant

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय दंड संहिता, जो 1860 में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन बनाई गई थी, में ऐसे अपराधों का एक समूह शामिल था जिनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था की मशीनरी को हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना था। यह धारा प्रावधानों के उस समूह (धारा 186–190) का हिस्सा है जो लोकसेवकों के विरुद्ध या उन लोगों के विरुद्ध दी गई धमकियों या किए गए अवरोधन को दंडित करती हैं जो वैध सहायता के लिए लोकसेवकों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हों। विचार यह है कि यदि किसी को आधिकारिक संरक्षण मांगने से डराकर रोका जा सकता है, तो संपूर्ण कानून प्रवर्तन तंत्र निष्प्रभावी हो जाता है — पीड़ित चुप रह जाते हैं, और लोकसेवक अपना संरक्षात्मक कर्तव्य नहीं निभा पाते।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा स्वयं मूल चोट की धमकी (जैसे किसी को पीटने की धमकी देना) को दंडित करती है।

    तथ्य: यह विशेष रूप से उस कृत्य को दंडित करती है जिसमें किसी को इस मंशा से धमकाया जाए कि वह किसी लोकसेवक से कानूनी संरक्षण न मांगे — इसका फोकस संरक्षण तक पहुँच को अवरुद्ध करने पर है, न कि मूल चोट की धमकी पर।

  • मिथक: यह कानून स्वयं लोकसेवकों के विरुद्ध दी गई धमकियों पर लागू होता है।

    तथ्य: वास्तव में यह उस साधारण व्यक्ति के विरुद्ध दी गई धमकियों पर लागू होता है, जो उसे किसी लोकसेवक से संरक्षण मांगने के लिए जाने से रोकने हेतु दी गई हों — यहाँ धमकी का लक्ष्य लोकसेवक नहीं, बल्कि वह व्यक्ति है जिसे संरक्षण लेने से रोका जा रहा है।