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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 175

repealed

Omission to produce document to public servant by person legally bound to produce it

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान दंड संहिता (IPC) की उन धाराओं (172-188) के समूह का हिस्सा है जो लोक प्रशासन और न्याय के सुचारु संचालन की रक्षा करती हैं। अनेक कानून नागरिकों पर यह कर्तव्य डालते हैं कि माँगने पर वे कर विवरणी, लाइसेंस, स्वामित्व कागजात या साक्ष्य जैसे अभिलेख अधिकारी को प्रस्तुत करें। यदि इंकार पर दंड न हो, तो ऐसे कानूनी दायित्व निरर्थक हो जाएँगे क्योंकि अधिकारी पालन कराने में असमर्थ रहेंगे। धारा 175 इन प्रस्तुतिकरण‑कर्तव्यों को जानबूझकर की गई अवहेलना को अपराध बनाकर प्रभावी बनाती है, जबकि दंड हल्का रखा गया है क्योंकि यह किसी हिंसक या कपटपूर्ण कृत्य के बजाय एक प्रशासनिक त्रुटि से संबंधित है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने रेखांकित किया है कि चूक ‘जानबूझकर’ होनी चाहिए—कोई व्यक्ति जो भूल गया, जिसका दस्तावेज़ खो गया, या जिसके पास उसे रोके रखने का कोई वास्तविक कानूनी आधार (जैसे विशेषाधिकार) है, वह दायित्वग्रस्त नहीं होगा। अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल उपस्थित न होना, उस दस्तावेज़ को प्रस्तुत न करने से भिन्न है जो व्यक्ति के कब्जे या नियंत्रण में है; यह धारा बाद वाले को लक्ष्य करती है। कुछ निर्णयों ने इसे धारा 176 (सूचना/नोटिस देने में चूक) से अलग माना है, यह बताते हुए कि धारा 175 विशेष रूप से भौतिक या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के बारे में है, सामान्य सूचना के बारे में नहीं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: किसी भी अधिकारी को दस्तावेज़ प्रस्तुत करने में असफल होना इस धारा के तहत हमेशा अपराध है।

    तथ्य: व्यक्ति का उस विशिष्ट दस्तावेज़ को प्रस्तुत करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होना आवश्यक है, और चूक जानबूझकर होनी चाहिए—आकस्मिक गुम हो जाना या वास्तविक असमर्थता गिनी नहीं जाती।

  • मिथक: यह धारा प्रश्नों का उत्तर देने या सूचना देने से इंकार करने को कवर करती है।

    तथ्य: धारा 175 विशेष रूप से किसी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को प्रस्तुत/सौंपने में विफल रहने से संबंधित है; मौखिक सूचना देना इसका विषय नहीं है (जो अन्य धाराओं, जैसे 176, में आता है)।