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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 164

repealed

Rep. by the Prevention of Corruption Act, 1988

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

मूलतः भारतीय दण्ड संहिता (1860) में लोक-सेवकों द्वारा रिश्वत लेने या भ्रष्ट आचरण से सम्बंधित कई धाराएँ थीं। समय के साथ विधिनिर्माताओं ने माना कि भ्रष्टाचार को सामान्य दण्ड संहिता में बिखरी धाराओं के बजाय एक समग्र और अद्यतन अधिनियम की आवश्यकता है। 1988 में संसद ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लागू किया ताकि भ्रष्टाचार-निरोधक कानून को एकीकृत और सशक्त किया जा सके, और इस विषय पर एक स्पष्ट एकमात्र कानून रहे—इसीलिए इस धारा सहित पुरानी, ओवरलैप करती आईपीसी धाराएँ निरस्त कर दी गईं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा आज भी किसी व्यक्ति पर भ्रष्टाचार का अभियोग लगाने के लिए प्रयुक्त की जा सकती है।

    तथ्य: इसे 1988 में क़ानून से पूरी तरह हटाया गया; अब भ्रष्टाचार के मामलों में इसके स्थान पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लागू होता है।