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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 155

repealed

Liability of person for whose benefit riot is committed

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान उस काल से आता है जब उपनिवेशकालीन भारत में भूमि-विवाद अक्सर हिंसक सामूहिक झड़पों में बदल जाते थे — जमींदार या दावेदार कभी-कभी आँख मूँद लेते थे, यहाँ तक कि संपत्ति संघर्षों में अपने हित में भीड़ को चुपचाप प्रोत्साहित कर देते थे। यह कानून ऐसे लाभार्थियों को जवाबदेह ठहराने के लिए बनाया गया था, ताकि वे निष्क्रिय रहकर लाभ कमाने के बजाय सक्रिय रूप से हिंसा रोकें।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: इस धारा के तहत दंडित करने के लिए आवश्यक है कि भूमिधर ने स्वयं दंगे का आयोजन किया हो या आदेश दिया हो।

    तथ्य: यह धारा सिर्फ इतना चाहती है कि दंगा उससे लाभ पहुँचाता हो और उसे (या उसके अभिकर्ता को) इसकी आशंका थी तथा उसने उसे रोकने या थामने का प्रयास नहीं किया — सक्रिय आयोजन आवश्यक नहीं है।

  • मिथक: यह धारा कारावास जैसी कड़ी सजा की अनुमति देती है।

    तथ्य: यहाँ निर्धारित दंड केवल जुर्माना है, कारावास नहीं।