Indian Penal Code, 1860
धारा 145
repealedJoining or continuing in unlawful assembly, knowing it has been commanded to disperse
Whoever joins or continues in an unlawful assembly, knowing that such unlawful assembly has been commanded in the manner prescribed by law to disperse, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extent to two years, or with fine, or with both.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान दंड संहिता की धारा 141 (अवैध जमाव की परिभाषा) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 (तितर-बितर करने के आदेश जारी करने की शक्ति) के साथ मिलकर काम करता है। औपनिवेशिक काल के विधिनिर्माताओं ने प्रत्यक्ष, औपचारिक तितर-बितर होने के आदेश की अवहेलना को अलग और अधिक कठोर अपराध माना—क्योंकि विधिसम्मत आदेश की अनदेखी केवल भीड़ में निष्क्रिय मौजूदगी नहीं, बल्कि लोक-व्यवस्था के जोखिम को जानबूझकर बढ़ाना मानी जाती है। यह दंगों, साम्प्रदायिक टकरावों या हिंसक प्रदर्शनों को बढ़ने से रोकने के लिए स्थल-पर दिए गए तितर-बितर के आदेशों को वास्तविक कानूनी बल देता है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
न्यायालयों ने सामान्यतः माना है कि तितर-बितर होने के आदेश का ज्ञान होना अनिवार्य है—अभियोजन को दिखाना होगा कि अभियुक्त को विधि द्वारा विनिर्दिष्ट तरीके से (उदाहरणार्थ दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत उद्घोषणा द्वारा) दिया गया आदेश ज्ञात था, मात्र भीड़ के अस्तित्व का पता होना पर्याप्त नहीं। न्यायालयों ने यह भी रेखांकित किया है कि तितर-बितर होने का आदेश स्वयं सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत और वैध रूप से जारी होना चाहिए; त्रुटिपूर्ण या सिद्ध न हुआ आदेश इस धारा के तहत मुकदमे को कमजोर कर देता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: केवल किसी भी अवैध जमाव का हिस्सा होने भर से ही इस धारा के तहत दंडित किया जा सकता है।
तथ्य: यह धारा विशेष रूप से मांग करती है कि (i) विधिसम्मत तितर-बितर होने का आदेश दिया गया हो, और (ii) व्यक्ति को उस आदेश की जानकारी हो—तभी उसके शामिल होने या ठहरे रहने पर दायित्व बनता है।
मिथक: सिर्फ कोई भी पुलिसकर्मी ‘तितर-बितर हो जाओ!’ चिल्ला दे, तो यह धारा अपने-आप लागू हो जाती है।
तथ्य: न्यायालय अपेक्षा करते हैं कि तितर-बितर होने का आदेश ‘कानून द्वारा विनिर्दिष्ट तरीके’ से जारी हो—अर्थात विधिक प्रक्रिया के माध्यम से (जैसे दंड प्रक्रिया संहिता के तहत)—ना कि अनौपचारिक या अप्रमाणित/अधिकृत-रहित आदेश द्वारा।