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सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 170

Repeal and savings

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

जब कोई देश किसी पुराने कानून को नए कानून से बदलता है, तो “निरसन एवं संरक्षण” (repeal and savings) प्रावधान एक मानक विधायी तकनीक होती है, जिससे भ्रम और अन्याय से बचा जा सके। न्यायालय और विधानसभाएँ सामान्यतः चाहती हैं कि जो मामले पहले से लंबित हैं, वे उसी नियमावली के तहत पूरे हों जिसके अंतर्गत वे शुरू हुए थे, न कि बीच में नए ढांचे से बाधित हों। यह अनुभाग उसी दीर्घकालिक विधायी परंपरा का अनुसरण करता है और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 से भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam), 2023 में सुचारू व न्यायसंगत संक्रमण सुनिश्चित करता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: पुराने साक्ष्य अधिनियम के निरस्त होते ही सभी लंबित मामलों को तुरंत नए अधिनियम के नियमों में नहीं बदला जाएगा।

    तथ्य: यह अनुभाग विशेष रूप से उन मामलों के लिए पुराने अधिनियम के नियमों को सुरक्षित रखता है जो नए कानून के लागू होने से पहले लंबित थे।

  • मिथक: यह कथन गलत है: किसी कानून के निरस्त होने से उसके अतीत या लंबित मामलों पर प्रभाव अपने-आप मिट नहीं जाता।

    तथ्य: ऐसी “संरक्षण धारा” (savings clause) यह सुनिश्चित करती है कि निरसन के बाद भी कुछ विशेष लंबित मामलों पर पुराना कानून लागू बना रहे।